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मुंबई हमला: तहव्वुर राणा को 14 साल जेल

नई दिल्ली/शिकागो/एजेंसी Updated Fri, 18 Jan 2013 06:03 PM IST
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US court sentences Rana for 14 years of imprisonment
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वर्ष 2008 में मुंबई हमलों के जिम्मेदार चरमपंथी गुट लश्कर-ए-ताइबा की मदद करने के लिए एक अमेरिकी अदालत ने तहव्वुर हुसैन राणा को 14 साल जेल की सजा सुनाई है।



उन्हें वर्ष 2009 में डेनमार्क के एक अखबार यलैंड्स पोस्तेन के कार्यालयों पर हमले की योजना बनाने के लिए भी दोषी पाया गया था। इस अखबार ने पैगंबर मुहम्मद पर विवादास्पद कार्टून छापे थे।
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राणा और उनके साथी, लश्कर-ए-ताइबा के चरमपंथी और मुंबई हमलों के मुख्य आरोपियों में से एक डेविड कोलमैन हेडली को शिकागो में अदालती ज्यूरी ने जून 2011 में दोषी ठहराया था। तहव्वुर राणा को मुंबई हमलों में शामिल होने के आरोप से बरी कर दिया गया था।
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राणा के साथी डेविड कोलमैन हेडली को 24 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। उन्हें मुंबई हमलों के मामले में कड़ी सजा की उम्मीद की जा रही थी लेकिन इस बीच वे सरकारी गवाह बन गए हैं और इसकी वजह से हो सकता है कि सज़ा बहुत कड़ी न हो।

भारत की पूछताछ
शुरू में तहव्वुर राणा पर भी मुंबई हमलों की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया था लेकिन अदालत ने उन्हें मुंबई हमलों की साजिश में शामिल होने के आरोप से बरी कर दिया गया था। हालांकि भारतीय जांचकर्ता अभी भी ने राणा पर लगाए गए आरोप पर कायम हैं और वो उनसे पूछताछ करने की कोशिश कर रहे हैं।

मुंबई हमलों में 160 से अधिक लोग मारे गए थे। केंद्रीय अदालत में जज ने 14 साल की जेल की सजा के बाद भी तहव्वुर राणा को पांच साल तक निगरानी में रखे जाने का भी हुक्म दिया है।

अदलात के फ़ैसले के बाद इलिनॉय प्रांत के कार्यवाहक अमेरिकी अटर्नी गैरी शपीरो ने कहा कि यह सख्त जेल की सजा उन लोगों के लिए सबक होनी चाहिए जो आतंकवादी कार्रवाई करने की सोच रहे हों। उन्हें पता चल जाना चाहिए कि वह आतंकवादियों को मदद देते हुए, पर्दे के पीछे छुपे नहीं रह सकते, और पकड़े जाने और सजा से बच नहीं सकते।

हेडली बना सरकारी गवाह
वो पाकिस्तानी मूल के कनाडा के नागरिक हैं। इससे पहले सरकारी वकीलों ने 52 वर्षीय राणा को 30 वर्ष की सजा दिए जाने की मांग की थी। जबकि अदालत में बचाव पक्ष के वकील सिर्फ नौ साल की ही सजा की अपील कर रहे थे।

अदालती कारर्वाई के दौरान राणा को एफबीआई के वीडियो टेप पर कहते सुना गया था कि हेडली ने लशकर के साथ प्रशिक्षण लिया था। राणा पर यह भी आरोप था कि उन्होंने हेडली को अपनी ट्रेवेल एजेंसी की शाखा मुंबई में भी खोलने की अनुमति दे दी थी जिसकी आड़ में हेडली ने हमलों की तैयारी की। इसके अलावा उसी एजेंसी के कथित एजेंट के तौर पर डेनमार्क जाने के लिए हवाई यात्रा का बंदोबस्त किया गया था।
 
हेडली को भारत में सार्वजनिक स्थानों पर बम हमलों की साजिश रचने और भारत में अमेरिकी नागरिकों की हत्या से संबंधित छह आरोपों में सजा-ए-मौत मिल सकती थी, लेकिन उन्होंने अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के साथ सजा में छूट संबंधी समझौता कर लिया। और राणा के खिलाफ अदालत में मुख्य गवाह बन गए।

पाकिस्तानी मूल के राणा ने साल 2001 में कनाडा की नागरिकता ले ली थी। और 2009 में गिरफ्तारी से पहले वह अमेरिका के शिकागो शहर में रह रहे थे। राणा शहर में ट्रैवल एजेंसी समेत कई व्यवसायों से जुड़ा हुए थे।

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