फर्जी मुहर-हस्ताक्षर से करवाए पौने दो के काम
-- द्वारीखाल ब्लॉक के गांव नैरूल में मनरेगा कार्यों में गड़बड़ी की आशंका
-- जिलाधिकारी ने डीपीआर को सौंपी जांच, वीडीओ से मांगा स्पष्टीकरण
हेमवती नंदन भट्ट
ऋषिकेश।
पौड़ी जिले के द्वारीखाल प्रखंड स्थित ग्रामसभा नैरूल में मनरेगा के तहत फर्जी ढंग से विकास कार्य करवाने का मामला सामने आया है। यहां बिना ग्राम प्रधान की सहमति से विकास कार्य करवाए गए। यही नहीं फर्जी मुहर और हस्ताक्षर करके 1 लाख 73 हजार रुपये की धनराशि भी आवंटित कर दी गई। मामला का खुलासा होने के बाद अब जिलाधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) को मामलेे की जांच सौंपी है। वहीं खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) से स्पष्टीकरण मांगा है।
नैरूल ग्राम सभा में मनरेगा के अंतर्गत खेतों में नमी को बरकरार रखने के लिए वर्षाकाल में जल संरक्षण के लिए दो तालाब निर्माण कराए गए, जिनकी लागत करीब 73 हजार बताई जा रही है। इसी प्रकार गांव के समीप जंगल में वर्षा जल संरक्षण के लिए खाल-चाल बनाए गए हैं। जिनकी लागत करीब एक लाख है। गांव में मनरेगा योजना के अंतर्गत यह विकास कार्य किये गये, लेकिन इन कार्यों की ग्राम प्रधान को कानों-कान खबर तक नहीं लगी। मामला तब खुला जब मनरेगा के अंतर्गत गांव में कुछ कार्य कराए जाने का प्रस्ताव लेकर नैरूल की ग्राम प्रधान अंजू देवी वीडीओ के पास पहुंची। उन्हें आवेदन पत्र देने पर वीडीओ ने उन्हें बताया कि ग्राम सभा नैरूल में मनरेगा योजना के अंतर्गत निर्माण कार्य हो चुके हैं। इस बाबत नैरूल की ग्राम प्रधान अंजू देवी का कहना है कि उन्होंने इससे पहले मनरेगा के तहत गांव में विकास कार्य का कोई आवेदन नहीं किया था। स्वीकृत हुए कार्य भी उनके संज्ञान में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जिस आवेदन के आधार पर गांव के लिए खाल-चाल व तालाब स्वीकृत किए गए, उस पर लगी मुहर व हस्ताक्षर फर्जी हैं। उन्होंने बताया कि उनकी मुहर ग्राम सभा नैरूल के नाम से है, जबकि उक्त फर्जी आवेदन पर लगाई गई मुहर ग्राम पंचायत नैरूल के नाम से बनाई गई है।
प्रधान ने डीएम से की जांच की मांग
द्वारीखाल ब्लॉक के अंतर्गत नैरूल ग्राम सभा में मनरेगा योजना के अंतर्गत हुए विकास कार्यों की जांच के लिए ग्राम प्रधान अंजू देवी ने जिलाधिकारी पौड़ी को पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति द्वारा ग्रामसभा की फर्जी मुहर व उनके फर्जी हस्ताक्षर के आधार पर इस योजना के कार्य के लिए आवेदन किए और स्वीकृति के बाद निर्माण कार्य कराए। उन्होंने आशंका जताई कि अगर इसी तरह से फर्जी कार्य हुए तो भविष्य में किसी भी तरह की धांधली होने पर उनके लिए खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने मामले की जांच व संबंधित व्यक्ति को दंडित करने की मांग की है।
वीडीओ से मांगा स्पष्टीकरण
खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) रमेश नेगी ने बताया कि नैरूल ग्रामसभा में फर्जी तरीके से मनरेगा योजना के कार्य का मामला संज्ञान में आया है। उक्त कार्य वर्ष 2016-17 में किए गए हैं। इस बाबत ग्राम विकास अधिकारी सुशील कुमार थपलियाल से स्पष्टीकरण मांगा गया है। वह इसी सप्ताह अपना जवाब दाखिल करेंगे।
क्या कहते हैं वीडीओ
ग्राम सभा नैरूल में मनरेगा के अंतर्गत कई कार्य हुए हैं। उक्त कार्यों के लिए ग्राम प्रधान की सहमति जरुरी नहीं है। ग्रामीणों ने आवेदन किए थे, जिन्हें मंजूरी दे दी गई। मैं अभी ट्रैफिक में फंसा हूं, इस बारे में ज्यादा बात नहीं कर पाऊंगा।
सुशील कुमार थपलियाल, ग्राम विकास अधिकारी नैरूल, द्वारीखाल।
कोट्स
मामला बहुत गंभीर
प्रधान द्वारा फर्जी मुहर व हस्ताक्षर की शिकायत जिलाधिकारी को सौंपी थी। इस मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी को जांच सौंपी गई है। 15 दिनों में रिपोर्ट मांगी गई है। जांच के दौरान ही सच्चाई का पता लग पाएगा। मामला बहुत ही गंभीर है, इसलिए इस प्रकरण में जो भी दोषी पाया गया, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विजय कुमार जोगदंडे, सीडीओ, पौड़ी।