श्रीनगर। एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय का संग्रहालय (म्यूजियम) सात साल बाद फिर गुलजार होगा। विवि के चौरास परिसर में तैयार हो रहे म्यूजियम में जल्द ही गढ़वाल की छठवीं सदी से लेकर आधुनिक काल की हिमालयन संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। एक माह बाद म्यूजियम को छात्रों और हिमालयी संस्कृति जानने के इच्छुक लोगों के लिए खोल दिए जाने की उम्मीद है।
गढ़वाल विवि के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की ओर से वर्ष 1980 में विवि की आवासीय कॉलोनी के समीप हिमालयन आर्कियोलॉजिकल एंड एंथोग्राफी म्यूजियम (एचएईएम) की स्थापना की गई थी। इस म्यूजियम में खुदाई में मिली वस्तुओं, कलाकृतियों, हिमालयी क्षेत्र की संस्कृति पर आधारित सामग्रियों को प्रदर्शन के लिए रखा गया था। वर्ष 2010 में भूस्खलन से म्यूजियम तबाह हो गया। तब यहां रखी कलाकृतियों को चौरास शिफ्ट किया गया। इस समयावधि में म्यूजियम पुन: चालू नहीं हो पाया। लंबी इंतजारी के बाद अब कलाकृतियों को डिस्पले बोर्ड में रखा जाने लगा है। वर्तमान में क्यूरेटर भगत पंवार के नेतृत्व में म्यूजियम को सजाया जा रहा है। इस बार म्यूजियम में एक अतिरिक्त गैलरी हिमालयन शवागार गैलरी बनाई जा रही है, जिसमें विभिन्न स्थानों में खुदाई में मिली वस्तुओं का प्रदर्शन किया जाएगा। विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद नौटियाल ने बताया कि म्यूजियम में पौराणिक वेशभूषा, भित्ति चित्र, पौराणिक शिल्प, मूर्तियां, मृदभांड व वाद्य यंत्र के साथ ही यहां की सभ्यता से जुड़ी हर छोटी-बड़ी चीजों को रखा जा रहा है। म्यूजियम खुलने से देश-विदेश के लोग हिमालयी संस्कृति से रूबरू होंगे।