ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने नगर क्षेत्र में पसरे अतिक्रमण को लेकर उच्च न्यायालय के आदेश के मद्देनजर होने वाले असर व निराकरण को लेकर बैठक में मंथन किया। मंगलवार को नगर निगम के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित बैठक में पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड में वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद से नगर का व्यापार पटरी से उतरा हुआ है। कहा कि न्यायालय के आदेश से नगर के व्यापारियों के समक्ष और अधिक समस्याएं उत्पन्न हो जाएंगी। उन्होंने इस बाबत उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल किए जाने का सुझाव दिया।
प्रतिनिधिमंडल के नगर अध्यक्ष जयदत्त शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश से दो हजार से अधिक व्यापारी प्रभावित हो रहे हैं, जिनके साथ काम करने वाले कर्मचारी और उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाएगा। इसके लिए उन्होंने एक टीम के गठन की बात कही है। बताया कि टीम में नगर की प्रमुख संस्थाओं के अध्यक्ष, महामंत्री और नगर के प्रमुख व्यक्ति शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इस बाबत वार्ता के लिए टीम जिलाधिकारी देहरादून से मिलकर अपना पक्ष रखेगी और न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का आग्रह करेगी। महामंत्री ललित मोहन मिश्र ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश का गहनता से अध्ययन किया जा रहा है।
इस दौरान नवल कपूर, राजीव मोहन अग्रवाल, संजय व्यास, संदीप गुप्ता, पवन शर्मा, हर्षित गुप्ता, राजकुमार तलवार, अशोक थापा, राहुल शर्मा, राजू शर्मा, आशु डंग, जगमीत सिंह, हरदेव पनेसर, मदललाल जाटव, रवि जैन, प्रवीन अग्रवाल, जितेंद्र खुराना, श्रवण जैन, विवेक तिवारी, आशु अरोड़ा, प्रदीप दुबे, राजकुमार कश्यप, नरेश, रमन नारंग, रविंद्र गुप्ता, चंद्रेश्वर जैन, जितेंद्र आनंद, दिनेश कुमार अरोड़ा, नवीन भारद्वाज, मोतीराम टुटेजा, शिवम टुटेजा, प्रदीप कोहली, ललित सक्सेना, विवेक वर्मा, मनोज कालरा, अशोक सीकरी, विवेक श्रीवास्तव, आदि मौजूद थे। उधर देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल का कहना है कि न्यायालय के आदेश का पालन होना चाहिए, मगर इसकी आड़ में राजनीति चमकाने के लिए व्यापारियों का उत्पीड़न हरगिज नहीं होना चाहिए। उन्होंने चेताया कि ऐसा हुआ तो व्यापार मंडल उसका विरोध करेगी।