उत्तराखंड में मतदान अधिक होने से आम आदमी पार्टी भी प्रमुख दलों के समीकरणों को बिगाड़ने की स्थिति में है। भाजपा कांग्रेस के साथ आप प्रत्येक लोकसभा सीट पर टाप थ्री में जगह बनाती दिख भी रही है।
तीन सीटों हरिद्वार, टिहरी और नैनीताल से आप को सर्वाधिक भरोसा है। पार्टी के वरिष्ठ लोग मानते हैं कि अगर यूपी की तरह उत्तराखंड में आप के बड़े नेताओं के प्रचार उन्हें मिला होता तो आप उलटफेर करने की स्थिति में था।
तीसरा बड़ा दल साबित हो सकता है
आम आदमी पार्टी उत्तराखंड में भाजपा कांग्रेस के बाद तीसरा बड़ा दल साबित हो सकता है। हालांकि बसपा और सपा के मत प्रतिशत को पार पाना आप के लिए कड़ी चुनौती है।
पांच सीटों पर प्रत्याशी उतारने वाले आप के लिए बसपा और सपा को चुनौती देना इसलिए भी आसान है क्योंकि भाजपा और कांग्रेस के अलावा आप ही सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
आप कुछ सीटों पर बेहतर स्थिति में दिख रही है, जिसमें टिहरी से आप के प्रत्याशी अनूप नौटियाल, हरिद्वार में पूर्व डीजीपी कंचन चौधरी और नैनीताल में कवि बल्ली सिंह चीमा का प्रचार बड़े राजनीतिक दलों की टक्कर का रहा है। अल्मोड़ा और पौड़ी में आप शहरी आबादी तक ही सीमित रही है।
भाजपा-कांग्रेस के समीकरण हो सकते हैं प्रभावित
आप के नेता मानते हैं कि राज्य में संगठन का ढांचा अभी भाजपा और कांग्रेस जैसे बड़े दलों के मुकाबले का नहीं है, जिससे प्रचार के दौरान उनको मुश्किलें भी आई हैं।
इसके अलावा जहां भाजपा से नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, वीके सिंह सहित कई दिग्गज नेता और कांग्रेस से सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने उत्तराखंड में प्रत्याशियों का प्रचार किया वहीं आप की सीनियर लीडरशिप उतना समय नहीं दे पाई।
आप संयोजक अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सुसोदिया तो एक बार भी उत्तराखंड नहीं आए। इन सब दिक्कतों के बावजूद आप का प्रचार टिहरी, हरिद्वार और नैनीताल संसदीय सीट पर भाजपा कांग्रेस के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। आप भले इन सीटों पर पहले दो स्थानों पर नहीं रहे, लेकिन मत प्रतिशत में उसका दखल दिग्गजों के समीकरणों पर भारी पड़ेगा।