भाजपा कांग्रेस के अलावा अन्य दलों की उत्तराखंड की पांच संसदीय सीटों पर हालत पतली है। भाजपा कांग्रेस के बाद मत फीसदी में बसपा तीसरे स्थान पर है। सोलहवें लोकसभा चुनावों में उत्तराखंड में सबसे ज्यादा नुकसान बसपा को हुआ है।
बसपा प्रदेश में तीसरी बड़ी पार्टी बनी हुई है पर उसके मत प्रतिशत में तेजी से कमी आई है। बसपा को 4.2 प्रतिशत मत प्राप्त हुए हैं।
बसपा का हरिद्वार और नैनीताल में मत फीसदी 2009 के लोकसभा चुनावों के मुकाबले घटकर आधा रह गया है।
लोकसभा चुनाव में पहली बार मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी उत्तराखंड में वोट प्रतिशत में पांचवे स्थान पर है। हालांकि उक्रांद के प्रत्याशियों को आयोग से मान्यता नहीं मिल पाई थी।
आप और सपा की हालत पतली
अन्य दलों में आप का नैनीताल और टिहरी में अच्छा प्रदर्शन रहा, लेकिन अन्य सीटों पर उसकी हालत बेहद पतली है।
सपा ने तीन सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं लेकिन सपा की हालत आप से भी खराब है। सपा वोट प्रतिशत के मामले में उत्तराखंड में छठे स्थान पर है।
सपा की हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सपा को नोटा से भी कम वोट मिले हैं। कम्युनिस्ट पार्टियां छठे स्थान हैं, जबकि निर्दलीय के तौर पर उतरी उक्रांद खेमेबाजी के चलते छठे स्थान हैं।
अन्य दलों की स्थिति पर एक नजर
1- टिहरी-गढ़वाल में आप तीसरे स्थान पर, बसपा चौथे पर। पांचवें स्थान पर निर्दलीय। 2- पौड़ी-गढ़वाल में बसपा तीसरे स्थान पर, सीपीआई एमएल चौथे पर। आप को पांचवां स्थान। 3- हरिद्वार में बसपा तीसरे स्थान पर, आप चौथे स्थान पर। सपा को पांचवां नंबर। 4- नैनीताल में बसपा तीसरे स्थान पर, आप चौथे स्थान पर। सपा यहां भी पांचवें नंबर पर। 5- अल्मोड़ा में बसपा तीसरे स्थान पर, निर्दलीय सज्जन लाल चौथे स्थान पर। हालांकि दोनों उम्मीदवारों को नोटा को मिले मतों से कम वोट प्राप्त हुए हैं।