सरकारी अफसरों और कर्मचारियों को भी अब नोएडा में आसानी से आवास मिल सकेंगे। प्राधिकरण ने सरकारी महकमों को ग्रुप हाउसिंग भूखंड के आवंटन का रास्ता साफ कर दिया है। प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया गया है।
दरअसल, अब तक सरकारी महकमों को भी अपने अफसरों और कर्मचारियों को आवास बनाने के लिए सीधे तौर पर भूखंड खरीदने की छूट नहीं थी। प्राधिकरण से ग्रुप हाउसिंग योजना निकलने पर सरकारी महकमे आवेदन कर सकते थे।
बिड के जरिए भूखंड आवंटित किया जाता है। सबसे अधिक बोली लगाने वालों को भूखंड आवंटित किए जाते हैं। सरकारी महकमे ज्यादा कीमत नहीं लगा पाते थे। इस कारण उनको भूखंड नहीं मिल पाता था। बीते कई वर्षों से एक भी सरकारी ग्रुप हाउसिंग नहीं बन सकी।
इस कारण सरकारी महकमों में तैनात अफसरों और कर्मचारियों को अपने रिहायश के लिए बिल्डरों और प्राधिकरण की आवासीय योजनाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके लिए उनको अधिक कीमत भी चुकानी पड़ती है।
बीते सोमवार को नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया है कि भारत सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के अधीन सरकारी, अर्द्ध सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों के अफसरों व कर्मचारियों को सीधे तौरे पर रिजर्व प्राइस (रिजर्व प्राइस अमूमन आवंटन दर के बराबर होता है) पर ग्रुप हाउसिंग भूखंड आवंटित कर दिए जाएंगे।
बशर्तें उनका दफ्तर यहां हो और उनको दफ्तर के लिए प्राधिकरण से संस्थागत भूखंड पहले आवंटित किए गए हों। जानकारों का कहना है, कि प्राधिकरण के इस फैसले से सरकारी संस्थानों में कार्यरत अफसरों और कर्मचारियों के आवास की समस्या खत्म हो जाएगी। सरकारी महकमे प्राधिकरण से ग्रुप हाउसिंग भूखंड लेकर फ्लैट बना सकेंगे। नोएडा में राज्य के साथ ही केंद्र के तमाम महकमों के दफ्तर हैं।