शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालने की कोशिश
प्रदर्शनकारी छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय की ओर मार्च निकालने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने पेपर लीक, स्कोर कैलकुलेशन में कथित त्रुटियों और परीक्षा संचालन में हुई अव्यवस्थाओं के खिलाफ नारेबाजी की।
छात्र संगठनों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें मंत्रालय तक पहुंचने से रोक दिया। आरोप है कि कई छात्र कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया। हालांकि, पुलिस की ओर से कहा गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 8 से 10 छात्रों को हिरासत में लिया गया था।
कपासहेड़ा थाने ले जाए गए छात्र
प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने दावा किया कि हिरासत में लिए गए छात्रों और कार्यकर्ताओं को कपासहेड़ा पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां उन्हें कई घंटों तक रखा गया।
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही और भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गई है। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी समस्याओं ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है।
सरकार पर विरोध दबाने का आरोप
AISA की दिल्ली विश्वविद्यालय सचिव अंजलि ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की चिंताओं को दूर करने के बजाय विरोध प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
वहीं प्रदर्शन में शामिल KYS कार्यकर्ताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। संगठन ने NTA को भंग करने और परीक्षा एजेंसी के कामकाज की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की भी मांग उठाई।
NEET और CUET का भी किया जिक्र
KYS ने अपने बयान में इस साल NEET परीक्षा रद्द होने की घटना का जिक्र किया, जिसे पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द किया गया था। इसके अलावा संगठन ने 30 मई को आयोजित CUET-UG परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ियों और कई परीक्षा केंद्रों पर सामने आई अव्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया।
संगठन का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में लगातार हो रही अनियमितताओं ने छात्रों के बीच परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है।
कोचिंग उद्योग और शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
KYS ने यह भी कहा कि बार-बार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों को शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण और कोचिंग उद्योग के बढ़ते प्रभाव के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।
छात्र संगठनों ने केंद्र सरकार से परीक्षा विवादों पर सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए बड़े स्तर पर संरचनात्मक सुधार जरूरी हैं।