मिंजर मेला की पहली सांस्कृतिक संध्या चंबा के गायक दुनी चंद राठौर के नाम रही। बड़े-बड़े इंतजाम के बीच छोटे से गायक ने मौजूद दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।
प्रशासन ने पहली संध्या में प्राइम टाइम पर पार्श्व गायिका प्रियाणी वाणी और अनादि मिश्रा को बुलाया था। लेकिन अनसुने से नामों की वजह से ज्यादा भीड़ उन्हें देखने और सुनने के लिए नहीं जुटी। जबकि चंबा के लोक गायक दुनी चंद राठौर ने एक के बाद एक पहाड़ी गीत पेश कर स्थानीय लोगों की तारीफ बटौर ली। दुनी चंद ने गौरी दा चित लगेया चंबे दिया धारां समेत कई मशहूर गीत प्रस्तुत किए।
मिंजर मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या का आगाज मुसाधा गायन से हुआ। जिसमें रोशन लाल एंड पार्टी के मुसाधा प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने हरि ओम नम शिवाय, शिव कैलाशों के वासी व चिटठा तेरा चोला काला डोरा जैसे पारंपरिक गीत गुनगुनाए। इसके बाद सुभाष लोक गायक मंडली ने चंबा की ऐंचली में भोले स्वामी दा ब्याह लगूरा व भौंरा ओ अलगर्जिया भौंरा के माध्मय से लोक कला की झलक बिखेरी। इसके बाद चंबा की मधु और धर्मशाला के हाईजेकर ग्रुप ने अपनी प्रस्तुतियां देकर सांस्कृतिक संध्या की शाम को आगे बढ़ाया। इसके बाद चंबा राजेश बाली ने नी ओ कसम तिजो खुदा दी चंबियाली गाना गाकर सबकी वाहवाही लूटी। तो गौतमी ने जुगनी, पिया तू अब तो आजा व झूम झूम झूम बाबा जैसे बॉलीवुड के गाने गाकर अपनी आवाज का जादू बिखेरा। तत्श्चात अजीत बट्ट ने कुंजड़ी मल्हार गाकर सांस्कृतिक संध्या को चरम ते ले जाने का काम बखूबी किया। एनजेडसीसी पटियाला के आंध्रा प्रदेश के ग्रुप ने अपनी संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियां देकर लोगों को आंधा की संस्कृति से परिचित करवाया।
इसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए एनजेडसीसी के तमिलनाडू के ग्रुप ने तमिल संस्कृति से संबंधित प्रस्तुतियां दी। इसेक बाद शाम आठ बजे से लेकर दस बजे तक प्रियाणी वाणी और अनादि मिश्रा की धमाकेदार प्रस्तुति ने रंग मंच में बैठे सभी दर्शकों केे झुमने पर मजबूर कर दिया। जिसमें अनादि मिश्रा ने माए नी मेरिए शिमले दी राहें, दिल संभल जा जरा, मुस्कुराने की वजह तुम हो व कबबाली अखियां उड़ेकदियां गाकर प्राइम टाइम में रंग लादिया। तो प्रियाणी वाणी ने सोनिए, जगी जगी सी, गुड नाइट व दिल यह बेकरार सा क्यूं हैं आदि गीत पेश किए।