मंडी। हिमाचल रोजगार संघर्ष यात्रा पर निकले पूर्व मंत्री एवं विधायक जीएस बाली ने कहा कि 70 लाख की आबादी वाले प्रदेश में दस लाख बेरोजगारों की फौज चिंता का विषय है। जबकि राज्य सरकार विभिन्न उद्योगों और परियोजनाओं में 70 प्रतिशत रोजगार सुनिश्चित करवाने में असफल रही है। अपनी इस यात्रा को गैर राजनीतिक करार देते हुए बाली ने कहा कि विधानसभा में उनके द्वारा लाए गए प्रस्ताव को सरकार ने बहुमत होने की वजह से गिरा दिया था। मगर मैंने तभी कहा था कि इस मुद्दे को लेकर मैं गांव-गांव शहर-शहर जाऊंगा।
बाली ने कहा कि उनकी यह यात्रा तीन चरणों में चलेगी। पहली मनाली के हिड़िंबा मंदिर से माता भलेई मंदिर तक। दूसरे चरण में गुरुद्वारा पांवटा साहिब से काठगढ़ और तीसरे चरण में किन्नौर से ब्रजेश्वरी मंदिर तक यह यात्रा चलेगी। राज्य सरकार को बेरोजगारों के लिए ठोस नीति बनानी होगी। इसमें रोजगार न दे पाने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने की व्यवस्था करनी होगी। इससे पहले कि यह समस्या विकराल रूप धारण करे। सरकार को बेरोजगारों के लिए नीति बनानी चाहिए। जब सरकार आबकारी और शराब के लिए नीति बना सकती है तो फिर बेरोजगारों के लिए नीति क्यों नहीं बना सकती। भाजयुमो की ओर से काले झंडे दिखाने को लेकर बाली ने कहा कि ऐसा करके उन्होंने दर्शा दिया कि वे युवाओं को रोजगार नहीं देना चाहते हैं। सरकार बताए कि जेपी ने प्रदेश में कितने लोगों को रोजगार दिया, और सरकार ने जेपी के खिलाफ क्या कार्रवाई की। हमारे पहाड़ों का सीना फाड़ कर जल विद्युत परियोजनाएं और सीमेंट उद्योग लगाए जा रहे हैं। मगर हमारे युवाओं को रोजगार नहीं दिया जा रहा है। जबकि बड़ी कंपनियों को करोड़ों का लाभ दिया जा रहा है। बाली ने कहा कि उनकी यात्रा यूं तो गैर राजनीतिक है, फिर भी बड़े नेताओं का उन्हें आशीर्वाद प्राप्त है। केंद्रीय मंत्री वीरभद्र सिंह ने पत्र लिख कर उन्हें शुभ कामनाएं दी है। जबकि प्रदेश अध्यक्ष कौल सिंह ठाकुर की भी इस यात्रा को लेकर सहमति है।