सुंदरनगर (मंडी)। राज्य स्तरीय नलवाड़ मेले में नगौण खड्ड में सजी पशु मंडी में इस बार बौलू नस्ल के बैल सबसे अधिक कीमत पर बिके। मेले में करीब एक करोड़ तक कारोबार हुआ है। अब मेला से बैल जा चुके हैं। पिछले साल जहां मेले में कारोबार फीका रहा था वहीं इस बार यहां पर हजारों की तादाद में बैल की बिक्री के लिए पहुंचे थे।
कुछ सालों से किसान ने बैलों के बजाए ट्रैक्टरों के माध्यम से खेती करना शुरू कर रखी है। लेकिन डीजल के दाम बढ़ने से ट्रैक्टरों के भाड़े में बढ़ोतरी होने के बाद अब एकबार फिर लोगों ने बैलों की तरफ रुख किया है। पशुओं की खरीद करने आए ब्रहमदास, हेमराज, राम सिंह, परमजीत सिंह ने बताया इस दफा सुंदरनगर के मेले में पहाड़ी और हरियावणी नस्ल के उम्दा बैल आए थे। इनके दाम पांच हजार से 15 हजार तक प्रति जोड़ी के बीच रहे। यह दाम ज्यादा जरूर थे लेकिन यह किसानों को सस्ती खेती करने के साथ साल भर गोबर प्रदान करते हैं। इससे सीजन में किसान को जैविक खाद की कमी नहीं रहेगी। पंजाब से बौलू नस्ल के बैल मेले में आए थे। इनकी कदकाठी काफी बड़ी होती है। यह बैल मैदानी इलाकों के लिए सबसे बढ़िया रहते हैं। इनमें दमखम ज्यादा होता है इसलिए यह एक दिन में दूसरे बैलों के मुकाबले ज्यादा काम देते हैं। बौलू किस्म के बैल खरीदने वाले सुंदरनगर के जड़ोल निवासी सत्यदेव, महादेव के सुरेंद्र पाल और बैहली के केसरी लाल ने बताया उन्होंने बौलू किस्म के बैलों की जोड़ी 20 हजार से 30 हजार के बीच खरीदी है। बैलों की कीमत अनेक दांत देख कर लगाई जाती है। इससे उनकी उम्र का पता चलता है। करसोग, सराज और कुल्लू से आने वाले मध्यम कद काठी के बैल पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों की पहली पसंद रहे। इन्हें कांगड़ा और बिलासपुर जिले के मझोले किसान हर वर्ष सुंदरनगर नलवाड़ मेले से खरीद कर ले जाते हैं। इनका दाम प्रति जोड़ी पांच से आठ हजार रहता है। मेला कमेटी के अध्यक्ष हरिकेश मीणा ने बताया मेले में इस बार बैलों का अच्छा कारोबार होने से व्यापारी खुश हैं।