जम्मू। आठ अक्तूबर सन 2005 का काला दिन। सुबह करीब नौ बज कर बीस मिनट का समय। 7.6 रिक्टर स्केल पर कांपी धरती। भारत के जम्मू कश्मीर के अलावा पाक अधिकृत कश्मीर, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान और पश्चिम चीन में इसके झटके महसूस किए गए।
भूकंप के झटके कितने जोरदार होंगे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस दौरान भारत में करीब चौदह सौ, जबकि सीमा पार पचहतर हजार और अफगानिस्तान में चार लोगों की जान गई। एक मोटे अनुमान के अनुसार इस दौरान एक लाख, बीस हजार मकान क्षतिग्रस्त हुए, जिसमें से 43 हजार पूरी तरह बर्बाद हो गए थे। भूकंप को बीते चाहे सात साल हो गए हों, लेकिन पहाड़ों में डर अभी भी जिंदा है। भूकंप केबाद पूरे राज्य में युद्ध स्तर पर अभियान छेड़ा गया। वहीं, सन 2005 को रियासत में आए भीष्णकारी भूकंप के सात साल पूरा होने पर कश्मीर संभाग के आयुक्त डा. असगर हसन सामून की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया।
इस मौके पर संभाग के जिला आयुक्तों ने हिस्सा लिया और आपदा प्रबंधन की दिशा में चलाए जा रहे कामों पर चर्चा की। इस मौके पर आम लोगों से अपील की गई कि वह निर्माण के दौरान दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करें और सुरक्षा के लिए सुरक्षित बिल्डिंगों का निर्माण करें।