जम्मू। रविवार को भारत और पाकिस्तान के बीच सीज फायर (युद्ध विराम) के नौ साल पूरे हो गए। इस दौरान सीमांत क्षेत्रों में अमन के साथ विकास भी हुआ। जम्मू कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी पर की गई तारबंदी का लाभ भी सामरिक दृष्टि से और स्थानी अवाम को मिला। सीज फायर के बावजूद पाकिस्तान ने कई मौकों पर आतंकियों को घुसपैठ कराने के इरादे से इसका उल्लंघन किया। आईबी और एलओसी पर भारतीय इलाकों में कई दफा पाकिस्तान ने फायरिंग की। जारी वर्ष में अब तक पाकिस्तान ने 30 से ज्यादा बार सीमांत इलाकों में गोलियां बरसाई। इस दौरान सीमांत किसानों की समस्याएं बरकरार है।
सेवा निवृत्त ब्रिगेडियर सुचेत सिंह का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहल पर पाकिस्तान के साथ युद्ध विराम हुआ था, लेकिन पाकिस्तान ने ईमानदारी से कभी भी युद्ध विराम का पालन नहीं किया। पाकिस्तान की नियत में खोट है। सांबा में मिली सुरंग और सीमांत इलाकों में समय समय पर फायरिंग इसका प्रमाण है। ब्रिगेडियर सुचेत सिंह का कहना है कि गोलीबारी करने के बाद पाकिस्तानी सैन्य अफसर अथवा रेंजर फ्लैग मीटिँग का सामना करने से भी ताकत नहीं रखते। कई दफा ऐसा हुआ।
पूर्व केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री प्रो. चमन लाल गुप्ता के मुताबिक एनडीए सरकार के कार्यकाल में सीमा पर तारबंदी का काम शुरू हुआ था। सीज फायर के दौरान यह काम लगभग पूरा हो गया, कुछ सीमांत इलाकों में तारबंदी सैकड़ों मीटर जीरो लाइन से पीछे की गई है, इसको जीरो लाइन पर शिफ्ट करने की जरूरत है, ताकि किसानों की बर्बाद हुई जमीन आबाद हो सके। यूपीए सरकार इस संबंध में सीज फायर का फायदा उठाने में भी नाकाम रही। तारबंदी के साथ सेंसर और लाइट की व्यवस्था से घुसपैठ की घटनाआें में कमी जरूर आई। बकौल प्रो. गुप्ता जाहिर तौर पर सीज फायर का लाभ सीमांत लोगों को मिला, पाकिस्तान पर यकीन नहीं किया जा सकता। पाकिस्तानी सैनिक कभी भी फायरिंग शुरू कर देते हैं। इसका मकसद आतंकियों को घुसपैठ करवाना होता है। लिहाजा जरूरत पहले से अधिक सतर्क रहने की है। प्रदेश किसान मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष और विधायक चौधरी सुखनंदन का कहना है कि किसानों को माइनिंग और जीरो लाइन से लेकर तारंबदी के बीच आई जमीन का आज तक मुआवजा नहीं मिला। यह चिंताजनक है। यूपीए सरकार ने इस संबंध में कोई पहल नही की है।