जम्मू। रियासत में शुक्रवार को आल इंडिया आर्गेनाइजेशन आफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट की देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में दस हजार से ज्यादा दवा विक्रेता एक दिन की टोकन हड़ताल पर रहे। राज्य में पहली बार एक साथ हजारों ड्रग स्टोर पर ताले लगे रहने से मरीजों को खासी दिक्कतें झेलनी पड़ीं। अस्पतालों तक पहुंचे मरीजों को दवाइयों के लिए दरबदर होना पड़ा। हालांकि अस्पतालों के अधीन चलने वाली को-आपरेटिव दुकानों से कुछ राहत मिली, लेकिन दूरवर्ती लोगों को ज्यादा परेशानी से दो-चार होना पड़ा। इस बीच जम्मू-कश्मीर केमिस्ट एंड ड्रग एसोसिएशन के बैनर तले दवा विक्रेताओं ने प्रेस क्लब के बाहर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की।
हड़ताल पर उतरे दवा विक्रेता दवा विक्रय के क्षेत्र में एफडीआई की घुसपैठ के साथ नई दवा नीति में दवा विक्रेताओं का मुनाफा कम करने, फार्मासिस्ट समस्या का अब तक उचित निराकरण न होने और दवा कानून संशोधन 2008 में सुधार न लाने का विरोध कर रहे थे। एसोसिएशन के राज्य संयोजक रोहित शर्मा और आयोजक सचिव गुरमीत सिंह ने कहा कि हड़ताल के बारे में सरकार को पहले से ही जानकारी दी गई थी, लेकिन उनकी ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया। खुदरा और थोक में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा।
सरकार के ड्रग एक्ट 2008 में संशोधन करने से अगर किसी दवा विक्रेता से कोई घटिया दवाई पकड़ी जाती है तो उसे सीधा पार्टी बनाकर कानूनी प्रक्रिया मेें फंसा दिया जाएगा, जबकि वह पीछे उत्पादन से पैकेट बंद दवाई बिक्री कर रहा है। वह ऐसे मामलों में गवाह बन सकता है, लेकिन उसे सीधा पार्टी न बनाया जाए। इसी तरह ड्रग एंड प्राइस कंट्रोल आर्डर में खुदरा विक्रेताओं के मुनाफे को कम किया जा रहा है। जबकि महंगाई के दौर में इस मुनाफे को बढ़ाया जाना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि हड़ताल में संभाग भर से सभी जिलों के दवा विक्रेताओं का भरपूर समर्थन मिला।