जम्मू। भारत-पाक सीमा पर लगातार फायरिंग और पाक सेना द्वारा रिहायशी क्षेत्रों को निशाना बनाए जाने के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। रात के समय भी लोग अपने घरोें में बनाए गए सुरक्षित स्थान बंकरों में सो रहे हैं। फायरिंग की आवाज के बीच सहमे लोग, घर के आंगन में भी एहतियात बरत रहे हैं। भारी फायरिंग के बीच बच्चों को भी दुबक कर अपने घरों में रहना पड़ रहा है। सीमा पर अब सीज फायर का उल्लंघन आम होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में भी गोले दागे जा रहे हैं। गांव नजवाल के सरपंच नसीब सिंह के अनुसार कई बार गोलाबारी के कारण पलायन की स्थिति भी बन जाती है। उनके गांव में 1999 में एक आईईडी फटी थी। उसके बाद करगिल युद्ध के दौरान गांव से पलायन हुआ। बीच-बीच में गोलियां चलीं, लोगों ने उनका निडरता से सामना किया। जय सिंह ने बताया तरह गोला गिरने से दहशत का माहौल है। जम्मू में भारत-पाक की 120 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तनाव का माहौल है। हीरानगर से घुसपैठ, सांबा में आतंकी हमला, आरएसपुरा में फायरिंग और अखनूर में गोलाबारी के कारण पूरा क्षेत्र दहशत के साये में है। इन क्षेत्रों में काफी आबादी रहती है और लोग अपने मवेशियों को भी चराने नहीं ले जा पा रहे हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भी पुंछ सेक्टर में भारतीय गांव पाक गोली की सीधे रेंज में है। पाक की तरफ जंगल है, जिससे उनके गांववासियों को दिक्कत नहीं होती है, लेकिन भारतीय क्षेत्र को पाक सैनिक हमेशा निशाना बनाते हैं।