जम्मू। जम्मू सीट पर चुनाव प्रचार जोरों पर है। हर पार्टी के अलावा आजाद उम्मीदवार प्रचार करने में जुटे हुए हैं। जम्मू लोकसभा सीट बीस विधानसभा क्षेत्रों पर आधारित है, जिसके तहत चार जिले आते हैं। इन जिलों में सांबा, जम्मू, राजोरी और पुंछ जिला शामिल है। दस अप्रैल को इस सीट पर होने वाले चुनाव में 18,00,510 मतदान उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला करेंगे। चारों जिलों की भौगोलिक संरचना और मतदाताओं का स्वरूप अलग-अलग होने के कारण मुद्दे भी अलग-अलग हैं।
जम्मू लोकसभा क्षेत्र जिन विधानसभा क्षेत्रों पर आधारित है, उनमें सांबा, विजयपुर, नगरोटा, गांधीनगर, जम्मू पूर्व, जम्मू पश्चिम, बिश्नाह, आरएस पुरा, सुचेतगढ़, मढ़, रायपुर दोमाना, अखनूर, छंब, नौशेरा, दरहाल, राजोरी, कालाकोट, सूरनकोट, मेंढर और पुंछ विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। सांबा से पुंछ तक फैले होने के कारण इस सीट के मतदाताओं से जब बात की गई तो सभी की अपनी-अपनी उम्मीदें हैं और अपने मुद्दे हैं।
जिला सांबा- सांबा के अलावा सीमावर्ती इलाकों का सबसे बड़ा मुद्दा सीमा पर तारबंदी के तहत आई उनकी जमीन है। उस जमीन का मुआवजा मिले, यह इन मतदाताओं के लिए अहम है। इन इलाकों में रोजगार का सबसे बड़ा विकल्प पुलिस या सशस्त्र बलों की नौकरी है। इन इलाकों के मतदाता सीमावर्ती युवाआें के लिए विशेष भर्ती अभियान चाहते हैं।
जिला जम्मू - अनदेखी, आतंकवाद, रिफ्यूजी, महंगाई, भ्रष्टाचार, ट्रैफिक, सुरक्षा और विस्थापन। जम्मू से अखनूर रोड पर रहने वाले लोगों के लिए जम्मू अखनूर रोड का फोर लेन किया जाना सबसे अहम है। वहीं, जम्मू और आसपास की तहसीलों की कंडी बेल्ट के लिए पीने का पानी, शिक्षा और यातायात बड़े मुद्दे हैं।
जिला पुंछ और राजोरी- विस्थापन, आतंकवाद, बार-बार सीमा पार से होने वाला सीज फायर उल्लंघन, गुज्जर बक्करवालों के अलावा पहाड़ी मतदाताओं की समस्याएं, भाषा, मानवाधिकार हनन, बिजली, रेल, मेडिकल कालेज आदि इन जिलों के मतदाताओं की मांग है।