जम्मू। जिस जगह डाक्टर की क्लीनिक है, वहीं पर मिलती है संबंधित दवाई। संभाग की चिकित्सा व्यवस्था में यह चलन लगातार बढ़ता जा रहा है। इस अव्यवस्था से मरीजों को क्लीनिकों के बाहर दुकानों से ही दवाइयां खरीदने को मजबूरन होना पड़ रहा है। उस पर बाजार में निर्धारित डोज से ज्यादा दवाई लेने के लिए मरीजों को मजबूर करने की समस्या भी बढ़ी है।
संभाग में जम्मू शहर में ही अधिक विशेषज्ञ डाक्टर क्लीनिकों में बैठते हैं लेकिन मरीजों के सामने उस समय दिक्कत खड़ी हो जाती है, जब उन्हें क्लीनिक के बजाय अन्य किसी जगह से डाक्टर द्वारा लिखी हुई दवाई नहीं मिलती है। मसलन राजोरी से एक मरीज अगर जम्मू में इलाज के लिए पहुंचा है तो उसे मजबूरन दवाई भी संबंधित चिकित्सा केंद्र के नजदीक से ही लेनी पड़ेगी। रियासत में करीब दस हजार थोक और खुदरा दवाई विक्रेता हैं, जिनमें जम्मू संभाग में ही करीब साढ़े चार हजार है। जानीपुर निवासी राजेश बत्रा ने कहा कि ड्रग माफिया का बाजार में बोलबाला है। ऐसे हथकंडे अपनाकर मरीजों पर ही ज्यादा दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें अधिक दवाई लेने को मजबूर किया जाता है।