जम्मू। 28 जून से शुरू हो रही श्री अमरनाथ यात्रा के लिए बालटाल का ट्रैक यात्रियों के लिए पूरी तरह से तैयार हो गया है। वहीं दूसरी ओर पहलगाम के ट्रैक पर अब भी छह से आठ फीट की बर्फ से ढके होने के कारण यात्रा के लिए बाधा भी बन रही है। श्री अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले अधिकतर श्रद्धालु पहलगाम के पारंपरिक रास्ते के साथ बालटाल के रास्ते का भी इस्तेमाल करते हैं। यात्रा पर जाने वाले ज्यादातर साधु-संतों का कहना है कि वे पारंपरिक रास्ते से ही भगवान भोले नाथ के दर्शन को जाना चाहते हैं। उनका कहना है कि पहलगाम के पारंपरिक रास्ते में भगवान शिव के कई सारे पड़ाव के दर्शन होते हैं। पुरानी मंडी स्थित श्री राम मंदिर में उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से आए महेश शीतल गिरि ने बताया कि वह पिछले कई साल से पहलगाम के रास्ते से ही यात्रा करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह पहलगाम के रास्ते से यात्रा करने को लेकर बड़ी गहरी आस्था रखते हैं, क्योंकि हिंदू पुराणों के मुताबिक कहा जाता है कि इस रास्ते में भगवान शिव के कई पड़ावों के दर्शन होते हैं और यह सच भी है।
मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर से आए रामचरण गिरि ने बताया कि वह पहलगाम रूट से ही यात्रा करना चाहेंगे। प्रशासन और बोर्ड की ओर से ट्रैक के साफ होने के निर्देश के मिलने के बाद ही यात्रा पर जाना पसंद करेंगे। वहीं महाराष्ट्र के अहमदनगर के उघड़ेमहाराज और हरिद्वार के भजन आनंद ने कहा कि वह तीन चार दिन तक ट्रैक के साफ होने का इंतजार करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर रास्ता साफ नहीं होता है तो वह बालटाल के रास्ते से ही यात्रा कर भगवान शिव के दर्शन करेंगे। नासिक के पंचवटी से आए नामदेव और इंदौर के देवास से आए हरिदास ने कहा कि जब भगवान शिव का आदेश होगा, तभी यात्रा शुरू होगी। उन्होंने बताया कि पहलगाम रूट पर भगवान शिव के विभिन्न पड़ावों के दर्शन होते हैं, जिसमें शेषनाग, वावबल, महागणेश, टाप पोषपत्थरी और पंचतरणी है।