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खड्ड पर हुए निर्माण को चिह्नित करने के निर्देश

ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 13 May 2016 11:38 PM IST
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खड्ड भूमि - फोटो : File Photo
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राज्य सरकार खड्ड भूमि से संबंधित मुद्दों पर नीति तैयार करेगी। हाईकोर्ट की ओर से वेटलैंड, मार्शलैंड, फ्लड चैनलों के साथ ही राजस्व रिकार्ड में खड्ड के तौर पर रिकार्ड की गई जमीन की सुरक्षा तथा उसकी बहाली के लिए नीति तैयार करने का निर्देश दिया है। 
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राजस्व मंत्री बशारत बुखारी ने शुक्रवार को राजस्व रिकार्ड तथा खड्ड भूमि के संबंध में उच्च स्तरीय बैठक में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि खड्ड प्राकृतिक जल निकासी का हिस्सा है। राज्य सरकार इनकी बहाली तथा संरक्षण के लिए वचनबद्ध है।

डिवकाम जम्मू डॉ. पवन कोतवाल ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जम्मू संभाग के खड्ड भूमि संबंधी मुद्दों की जानकारी दी। कहा कि पानी के बहाव वाले सभी रास्ते तथा स्रोत सरकार की संपत्ति हैं। इसके चलते गैर मुमकिन खड्डों को रोशनी एक्ट से बाहर रखा गया है।
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उन्होंने मंत्री को बताया कि कम बारिश होने के चलते खड्डों की चौड़ाई कम हो गई। इसके चलते इन पर निर्माण हुए। इससे ऐसी जमीन की प्रकृति बदल गई। कहा कि कानून के तहत राजस्व रिकार्ड में गैर मुमकिन खड्ड के तौर पर दर्ज जमीन का फर्दी इंतखाब पंजीकृत नहीं किया जा सकता है। 

मंत्री ने आवास एवं शहरी विकास, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, जेडीए, नगर निगम, चीफ टाउन प्लानर तथा संबंधित उपायुक्तों की कमेटी बनाकर ऐसी जमीनों की पहचान शुरू करने तथा इस बाबत विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा। मंत्री ने हिदायत दी कि रिपोर्ट स्पष्ट होनी चाहिए ताकि सरकार उचित ढांचे को जन सुविधा के लिए बरकरार रखे।

जहां जरूरत हो वहां खड्ड की बहाली के लिए ढांचे को गिराया जा सके। उन्होंने कश्मीर संभाग के लिए भी ऐसी ही प्रक्रिया शुरू करने की हिदायत दी। बैठक में लोक निर्माण, आवास एवं शहरी विकास, पीएचई और राजस्व विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। 
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