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चुनिंदा लोकप्रिय शेर....

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
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                                                  पूछा जो उन से चाँद निकलता है किस तरह 
ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूँ 
- आरज़ू लखनवी

ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मीं 
पाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है 
- बशीर बद्र

उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया 
देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया 
- मीर तक़ी मीर
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किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम 
तू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ 
- अहमद फ़राज़

इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर आ सको तो आओ 
मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है 
- मुस्तफ़ा ज़ैदी

न जी भर के देखा न कुछ बात की 
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की 
- बशीर बद्र

ग़ैरों से कहा तुम ने ग़ैरों से सुना तुम ने 
कुछ हम से कहा होता कुछ हम से सुना होता 
- चराग़ हसन हसरत

सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ 
ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ 
- ख़्वाजा मीर दर्द

मकतब-ए-इश्क़ का दस्तूर निराला देखा 
उस को छुट्टी न मिली जिस को सबक़ याद हुआ 
- मीर ताहिर अली रिज़वी

कह रहा है शोर-ए-दरिया से समुंदर का सुकूत 
जिस का जितना ज़र्फ़ है उतना ही वो ख़ामोश है 
- नातिक़ लखनवी

कोई क्यूँ किसी का लुभाए दिल कोई क्या किसी से लगाए दिल 
वो जो बेचते थे दवा-ए-दिल वो दुकान अपनी बढ़ा गए 
- बहादुर शाह ज़फ़र

आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं 
सामान सौ बरस का है पल की ख़बर नहीं 
- हैरत इलाहाबादी

सूरज हूँ ज़िंदगी की रमक़ छोड़ जाऊँगा 
मैं डूब भी गया तो शफ़क़ छोड़ जाऊँगा 
- इक़बाल साजिद

मिलाते हो उसी को ख़ाक में जो दिल से मिलता है 
मिरी जाँ चाहने वाला बड़ी मुश्किल से मिलता है 
- दाग़ देहलवी
6 वर्ष पहले
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