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वे तमाम शेर जो दिसम्बर के महीने पर लिख दिए गए

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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दिसम्बर का महीना सर्द महीना होता है और साथ ही साल का आख़िरी भी, पेश हैं शायरों के अल्फ़ाज़ इसी दिसम्बर के महीने पर 


ये साल भी उदासियाँ दे कर चला गया
तुम से मिले बग़ैर दिसम्बर चला गया
- अज्ञात


मैं एक बोरी में लाया हूँ भर के मूँग-फली
किसी के साथ दिसम्बर की रात काटनी है
- अज़ीज़ फ़ैसल
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फिर आ गया है एक नया साल दोस्तो

फिर आ गया है एक नया साल दोस्तो
इस बार भी किसी से दिसम्बर नहीं रुका
- अज्ञात


सर्द ठिठुरी हुई लिपटी हुई सरसर की तरह
ज़िंदगी मुझ से मिली पिछले दिसम्बर की तरह
- मंसूर आफ़ाक़

'अल्वी' ये मो'जिज़ा है दिसम्बर की धूप का

'अल्वी' ये मोजिज़ा है दिसम्बर की धूप का
सारे मकान शहर के धोए हुए से हैं
- मोहम्मद अल्वी


इरादा था जी लूँगा तुझ से बिछड़ कर
गुज़रता नहीं इक दिसम्बर अकेले
- ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

यकुम जनवरी है नया साल है

यकुम जनवरी है नया साल है
दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है
- अमीर क़ज़लबाश


हर दिसम्बर इसी वहशत में गुज़ारा कि कहीं
फिर से आँखों में तिरे ख़्वाब न आने लग जाएँ
- रेहाना रूही

दिसम्बर की शब-ए-आख़िर न पूछो किस तरह गुज़री

दिसम्बर की शब-ए-आख़िर न पूछो किस तरह गुज़री
यही लगता था हर दम वो हमें कुछ फूल भेजेगा
- अज्ञात


मुझ से पूछो कभी तकमील न होने की चुभन
मुझ पे बीते हैं कई साल दिसम्बर के बग़ैर
- मोहम्मद अली ज़ाहिर

7 वर्ष पहले
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