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जौन एलिया की शायरी से हट के पढ़ें उनके ये कलाम

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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                                                  जौन एलिया की शायरी को ख़ूब मुहब्बत मिली। उनके कहे शेर की सबसे ख़ास बात है कि आम से ख़ास तक हर कोई ख़ुद को उनसे जोड़ सकता है। आइए पढ़ते हैं उनके कहे कुछ और कलाम


चारासाज़ों की चारा-साज़ी से
दर्द बदनाम तो नहीं होगा
हाँ दवा दो मगर ये बतला दो
मुझ को आराम तो नहीं होगा
 
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शर्म दहशत झिझक परेशानी
नाज़ से काम क्यूँ नहीं लेतीं
आप वो जी मगर ये सब क्या है
तुम मिरा नाम क्यूँ नहीं लेतीं

साल-हा-साल और इक लम्हा
कोई भी तो न इन में बल आया
ख़ुद ही इक दर पे मैं ने दस्तक दी
ख़ुद ही लड़का सा मैं निकल आया

मेरी अक़्ल-ओ-होश की सब हालतें
तुम ने साँचे में जुनूँ के ढाल दीं
कर लिया था मैं ने अहद-ए-तर्क-ए-इश्क
तुम ने फिर बाँहें गले में डाल दीं

मैंने हर बार तुझ से मिलते वक़्त
तुझ से मिलने की आरज़ू की है
तेरे जाने के बाद भी मैंने
तेरी ख़ुशबू से गुफ़्तुगू की है

चाँद की पिघली हुई चाँदी में
आओ कुछ रंग-ए-सुख़न घोलेंगे
तुम नहीं बोलती हो मत बोलो
हम भी अब तुम से नहीं बोलेंगे

6 वर्ष पहले
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