नए किरदार आते जा रहे हैं
मगर नाटक पुराना चल रहा है
- राहत इंदौरी
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कैसे कैसे हैं रहबर हमारे
कभी इस किनारे, कभी उस किनारे
-'राज' इलाहाबादी
दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों
- बशीर बद्र
सियासत खेल है जादूगरी का
तमाशाई बनाया है किसी ने
- जावेद सिद्दीक़ी आज़मी