ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ायम रहे
नींद रखो या न रखो ख़्वाब मेयारी रखो
- राहत इंदौरी
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मैं लौटने के इरादे से जा रहा हूँ मगर
सफ़र सफ़र है मिरा इंतिज़ार मत करना
- साहिल सहरी नैनीताली
जानता है कि वो न आएँगे
फिर भी मसरूफ़-ए-इंतिज़ार है दिल
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इस उम्मीद पे रोज़ चराग़ जलाते हैं
आने वाले बरसों बाद भी आते हैं
- ज़ेहरा निगाह