बढ़ाकर हमसे ताल्लुकात देख लेना
हमसे कभी हमारी बात देख लेना
तुम भरोसा करो टूटने नहीं देगे
जोड़कर हमसे ज़ज्बात देख लेना
बड़े लहलोट है हम और लावण्य भी
करके कभी तुम मुलाकात देख लेना
क्यों चावल नहीं है पतीलें मे उसके
जारको की जाज्वल्य जात देख लेना
हौंसले क्या है परिंदों के 'कुँवर' उठा
नजरें आसमाँं की बिसात देख लेना
कुँवर अरुण
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