विज्ञापन

प्रथम देवी-शैल-पुत्री

विनय कुमार अवस्थी

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माँ-अम्बे वो शक्ति दो, चलें सत्य की राह 
        
                                                    
                            
मानवता ही धर्म हो, और कोई न चाह II

माँ दुर्गा के रूप में, प्रथम धरा अवतार 
शैलपुत्री स्वरूप में, महिमा अपरम्पार II

मंत्र "ह्रीं शिवायै नमः", जपें सभी कर ध्यान 
पूजन का दिन प्रतिपदा, मिले मोक्ष यह मान II

दुस्साहस करता अगर, दुष्ट प्रकृति शैतान 
अंत समय आया समझ, सच ले वो यह मान II

माँ दुर्गा प्रति भक्तगण, रखते व्रत नवरात्र 
इसी-भांति माँ का बनें, सभी दया के पात्र II

- विनय कुमार अवस्थी
अपर महाप्रबन्धक, एन टी पी सी
राजपुर, देहारादून

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajiv Tyagi

350 कविताएं

View Profile