रोम-रोम में बसने वाले
भक्तों के भगवान
मुझे अपने धाम बुलालें
हे जगन्नाथ भगवान
जय जय चारों धाम
भक्तों के करो कल्याण
बनाओ सबके काम
तुझे समर्पित निशदिन प्राण
समुद्र किनारे जगन्नाथ जी
बेड़ी में बंधे हुए हनुमान
बल-भद्र-शुभद्रा जगन्नाथ जी
सब पर दया करो निधान
कवि- अमरेश कुमार उपाध्याय
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