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छोटी सी भूल

अमरेश उपाध्याय

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरी रचना का शीर्षक है-
        
                                                    
                            
     छोटी सी भूल- 
       
एक छोटी सी भूल कितनी बड़ी नादानी थी
वोह इकतरफा प्यार की नई-नई कहानी थी

उसका अल्हड़पन और नटखट अठखेलियां
उसकी मासूमियत पर इतराती थी सहेलियां

इस इल्म का जैसे उसको कुछ भान ही न हो
हैरां हूं कि ऐ उसकी मोहब्बत की अदा न हो

हर कोई तो पूछने जानने को होता था बेताब
कोरी कल्पना नही हकीकत में है एक ख्वाब

कुछ नही सूझता बस आंखों में उसका चेहरा
हर कदम पर बैठा हुअा इश्क के ऊपर पहरा

कभी देख कर मुझको उसने जहां मुस्कराया
फिर क्या मुझ नादान को पंख निकल आया

छलका दर्द आंखों में फिर से जख्म उभर आया
मोहब्बत के इम्तहा में हमेशा से जख्म ही पाया

उस छोटी सी भूल का दर्द कभी बता नही पाया
चाहत उसको हमारी थी खुदा और करीब लाया

कवि- पं. अमरेश उपाध्याय


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