तेरा ये बात करने का अंदाज
कभी कभी तो खूब अपनापन दिखता है
पर न जाने क्यों
अगले ही पल बेगाना सा हो जाता है
पता नहीं क्या है तेरे दिल में छुपा
तू मुझसे सच मै अनजान है
या फिर जान के अनजान हो जाता है