जो राजनीति से ओतप्रोत है
नहीं चाहिए हमे ऐसा विकास
लाख बनाई सडंकें लम्बी-चौड़ी
फिर क्यूं दुर्घटनाएं होती आज।।
सड़क निर्माण में घोटाला करते
बनते ही बिखरे आ जाए दराज
मजदूर सोते खुले आसमान में
ठेकेदार को तुम हो देते आवास ।।
फोरलेन बनाकर तुम बड़े बड़े
उड़ा रहे हो गरीबों का उपहास
जनता भूखी सोती सड़कों पर
और तुम करते विकास की बात ।।
हमारी थी यह आशा रोजगार
शिक्षा मिलेगी आजादी के बाद
परन्तु तुम सड़क मरम्मत के नाम
पर करते बजट का महा विनाश ।।
- आशुतोष मिश्र
सकतपुर
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