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जनसंख्या

Abhay Chaurshiya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नही कोरोना हइया तावन,
        
                                                    
                            
कहर हमारी धरती पर।
हमे लग रहा जनसंख्या,
विस्फोट हमारी धरती पर।

जनसंख्या इस कदर बढ़ रही,
जिसका कोइ माप नही।
चार सादियाँ चौबिस बच्चे,
इन्हे कोई संताप नही।
फैल रहा आतंक धरा पर,
धरती त्राहिमाम कहे।
दूनियाँ की दूर्दशा देख कर,
आहत मन हे राम कहे।
जाल बिछ रहा कंकरीट का,
इस कदर इस धरती पर।
हमे लग रहा.................

कटते जंगल जलते जंगल,
जनसंख्या उत्पात है ये।
हाहाकार मचा जग मे,
प्राकृतिक उल्कापात है ये।
आने वाला समय भयावह,
लगता है आने वाला।
जनसंख्या ही इस धरती को,
लगता है निगल जाने वाला।
भारी पड़ जायेगा मानव,
खूद ही खूद की हसती पर।
हमे लग रहा...

यदि नियंत्रण नही हुआ तो,
वह दिन दूर नही होगा।
आसमान टूटैगा और,
दूनियाँ का महाप्रलय होगा।
वक्त निकलता जा रहा,
हाथों से हमारे इस कदर।
पेड़ कटते जा रहे,
हवा मे फैलता जा रहा जहर।
जनसंख्या का ही कहर है,
आज हमारी बस्ती पर।
हमे लग रहा...

अभय चौरसिया
 
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