विज्ञापन

भीड़ चल रही है...

Abhay Kumar

Mere Alfaz
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            भीड़ चल रही है
        
                                                    
                            
तू भी चल पङ,
मंजिल पूछने की हिमाकत न कर
अरे नामचीन हस्तियाँ भी चल रही हैं इसमें
तेर औकात क्या है
बस तू भी चल पङ,
अगर नुकसान उठायेगा
तब भी बङे-बङों के साथ तेरा
नाम जुङ जायेगा,
अगर गिर पङे सबके-सब
गहरी खाई में
तो तू कहना
अरे ये समूह आत्महत्या नहीं
साक्षात् विनाश है
जब बङे-बङे लोग न बचे तो
मैं तो जर्रा हूँ
मुझे तो जाना ही था,
भीङ चल रही है
बस तू भी चल पङ।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Monika Verma

105 कविताएं

View Profile

hem priya

441 कविताएं

View Profile