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एक चुनौती

Aditya Prakash

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिल चाहता, तेरे रुकने के लिए
        
                                                    
                            
कर दूँ एक पत्र तेरे नाम,
मगर हो गया सोचते-सोचते
मैं बेचैन-सा विराम |

है मुझमें नहीं वह हिम्मत
जो मैं लिख सकूं पत्र तुझे,
है तुझमें वह तेज
जो तुम हर बार छल लेते हो मुझे |

माना तुम हो गतिमान
मगर मेरी भी तो सुन लो
अगर मैं डर रहा आज तेरी गति से,
तो सुन लो, ऐ गतिमान समय
करूंगा मेहनत कुछ इस कदर
कि तुम कल डरने लगोगे मेरी प्रगति से |

माना तुम हो महान
ऐ समय तुम अपनी महानता रखना बरकरार
है मैंने कर दिया ऐलान
एक जंग तेरे नाम,
आऊंगा तेरे पीछे पीछे
बनकर तेरी परछाई
चाहे तुम हो जाओ कितनी भी गतिमान
मगर तेरे संग जंग में
मैं हार नहीं मानूंगा
करके मेहनत मैं,
पार करूंगा हर पहाड़ को
और एक दिन पा लूंगा अपनी मंजिल,
तू रहना तैयार मेरी विजय देखने
ऐ समय मैं आऊंगा,
मैं आऊंगा,मैं आऊंगा |

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