विज्ञापन

तुम

adventure Kunal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर नज़्म में तुम ,
        
                                                    
                            
हर लफ्ज़ में तुम
मैं तो ठहरा काफिर
पर मुझे निखारती
नायाब फरिश्ता तुम ।

हर अक्श में तुम,
हर ख्वाब में तुम
मैं तो ठहरा बंजर जमी
पर मुझे भिंगाती
शबनमी बूंद तुम ।

हर सवाल में तुम,
हर जवाब में तुम
मैं तो ठहरा फकीर
पर मुझे चमकाती,
नायाब कोहिनूर तुम ।

हर प्यास में तुम,
हर तलब में तुम
मैं तो ठहरा खामोश दरिया
पर मुझे डुबोती
मधुर रस तुम।

हर नज़्म में तुम ,
हर लफ्ज़ में तुम
मैं तो ठहरा काफिर
पर मुझे निखारती,
नायाब फरिश्ता तुम ।

कुनाल कंठ


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all