ऋतुओं का राजा
आया बसंत ,
स्वागत -स्वागत
तेरा बसंत।
स्वागत करते
किसलय तेरा ,
स्वागत करते
प्रसून तेरा।
कलियाँ भी
स्वागत करती ,
मुस्कातीं हैं
दे चिटकारी।
घर घर युवतीं
ख़ुशी मनातीं,
पीली साड़ी
पहिन निकलतीं।
पादप हों
या नर नारी ,
बसंती रंग है
सब पर भारी।
हाथों में
रची है मेंहदी ,
पैरों में
सजी महावर है।
खुशियां छाईं
दिग दिगंत ,
स्वागत स्वागत
तेरा बसंत।
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