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ऋतुराज बसंत

AL Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऋतुओं का राजा
        
                                                    
                            
आया बसंत ,
स्वागत -स्वागत
तेरा बसंत।
स्वागत करते
किसलय तेरा ,
स्वागत करते
प्रसून तेरा।
कलियाँ भी
स्वागत करती ,
मुस्कातीं हैं
दे चिटकारी।
घर घर युवतीं
ख़ुशी मनातीं,
पीली साड़ी
पहिन निकलतीं।
पादप हों
या नर नारी ,
बसंती रंग है
सब पर भारी।
हाथों में
रची है मेंहदी ,
पैरों में
सजी महावर है।
खुशियां छाईं
दिग दिगंत ,
स्वागत स्वागत
तेरा बसंत।

 हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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