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कृष्णा चरणोंदक

अनिल शर्मा

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चरणों चरणोदक मिल जाए,
        
                                                    
                            
बस शाम सहारा मिल जाए।
दोनों हाथों को बिछाए बैठा हूं,
एहसास चरणों का मिल जाए।
न धूल धूसरित हों कंकर न चुभे,
इन हाथों का बिछौना मिल जाए
नहीं धूप लगे, तूं हवा ठंडी रहना,
यह जलन चुभन सब मिट जाए।
अश्रुओं से धोऊं इन चरणों को,
अगर एक इशारा मिल जाए।
उनकी मर्जी में मस्त रहूं सदा,
चाहे ठोकर ही मुझे मिल जाए।
कब से मैं आस लगाए बैठा हूं,
शाम आज्ञा ही कोई मिल जाए।

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5 वर्ष पहले
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