स्वर्ण अक्षरों में जिसको लिख सकते थे
रद्दी में लिखकर क्या पाए।
मजबूरी उसकी न समझी,
या उसको मजबूर तुम बनाए।।
घोड़ा जो बन सकते थे,
उन्हे गधा बनाकर क्या पाया।
प्रतिभा के धनी अगर थे वो,
पैरों में जंजीर क्यों लटकाए।
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