ठंड रगों में उतर रही है,
खुश्की सांसों में बढ़ रही है,
दिन में कोहरे से धूप छिप रही है,
रात पर सर्दी की खुमारी चढ़ रही है!
कहीं लड़ाई चल रही है,
कहीं इंसानियत जल रही है,
कहीं है तरक्की, कहीं तंगहाली,
अजब हालात में दुनिया पल रही है!
फिर भी दुनिया सज रही है,
कहीं गिरजे में घंटी बज रही है,
प्रेम का संदेश लायेगा नन्हा यीशु,
उसकी प्रतीक्षा में दुनिया जग रही है!