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कसौटियां

Amber Srivastava

Mere Alfaz
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                            फेंक दे कसौटियों कोअपनी,
        
                                                    
                            
अब न और आजमाइश कर।

ज़ख्म भर रहे आहिस्ता से,
न इनकी और नुमाइश कर।

हिज़्र की रात कटी तन्हा जगते,
ज़ेरे सहर भूल जाने की न फरमाइश कर।

गहरी बहुत है दर्द की खाइयां,
उतर के गहरे और न पैमाईश कर।

मर चुका हूँ कब का कतरा कतरा,
कत्ल के मेरे रूह की अब न ख्वाहिश कर।

- अम्बर



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