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तनहा जिन्दगी

AMIT KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तनहा तनहा ही रह कर अपनी रात गुजारा करते है
        
                                                    
                            
मजबूरी मैं खुद ही खुद के सपनों को मारा करते है
किसी शख्स को गर जबसे हमनें अपना मान लिया
फिर उसके लिए हम अपनी जान भी वारा करते है
बुरे वक्त के साथ ही मेरे अपने भी मुझको छोड़ गए
इसीलिए ए खुदा अब तेरा ही नाम पुकारा करते है
 
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4 वर्ष पहले
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