विज्ञापन

तुम्हें देखकर

Amit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हें देखकर धड़कनें बढ़ जाती हैं,
        
                                                    
                            
तुम्हें देखकर सांसें थम जाती हैं,

तुमसे मिलकर बातें रुक जाती हैं,
तुमसे मिलकर पलकें झुक जाती हैं,

तुम्हें हर घड़ी महसूस करता हूं
बस तुम्हारी यादों में मशरूफ रहता हूं,

पता नहीं क्या हो गया है मुझको,
बस तुम्हीं को दिन रात याद करता हूं।।

अमित कुमार (सीतापुर)
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajiv Tyagi

350 कविताएं

View Profile