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मुक्तक

Amresh Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसी की सुबह अच्छी है,
        
                                                    
                            
किसी की शाम अच्छी है।
जोड़ दे टूटे दिल को जो,
वो राम-राम अच्छी है।
दुआ के वास्ते जिसमें
हजारों हाथ उठते हों,
बस वही प्रार्थना अच्छी
वही अज़ान अच्छी है।

अमरेश सिंह भदौरिया

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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