तेरी मेहनत को, कडी थूप ने सराहा है
गर्म हवाओ ने, सुखाया है पसीना तेरा
तेरे सामने तो, सर पर्वतो का झुकता है
तू जो चाहे तो रास्ता, सागरो का रुकता है
तुझे सलाम मेरा, तेरे जज्बे को सलाम
तेरी ही जात है, मेरे नग्मो की अवाम
(आनन्द कुमार)