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बाकी है

Anand Tripathi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माना हमारे बीच में तक़रार बाकी है
        
                                                    
                            
पर तेरी हर एक बात पे ऐतबार बाकी है
हाँ अब तुझे पाने की वो हसरत नहीं रही
लेकिन हमारे दिल में अभी प्यार बाकी है
हम कूँच ए जाना में अब जाते नहीं लेकिन
आँखों में अभी लज्जत ए दीदार बाकी है
जिनमें छुपा छुपा के तेरे ख़त पढ़े हमने
वो ख़त जला दिए मग़र अख़बार बाकी है
मेरे हक़ीम तू रक़ीब बन के चल दिया
पर दर्द ऐ मुंतज़िर तेरा बीमार बाकी है

आनन्द त्रिपाठी

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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