माना हमारे बीच में तक़रार बाकी है
पर तेरी हर एक बात पे ऐतबार बाकी है
हाँ अब तुझे पाने की वो हसरत नहीं रही
लेकिन हमारे दिल में अभी प्यार बाकी है
हम कूँच ए जाना में अब जाते नहीं लेकिन
आँखों में अभी लज्जत ए दीदार बाकी है
जिनमें छुपा छुपा के तेरे ख़त पढ़े हमने
वो ख़त जला दिए मग़र अख़बार बाकी है
मेरे हक़ीम तू रक़ीब बन के चल दिया
पर दर्द ऐ मुंतज़िर तेरा बीमार बाकी है
आनन्द त्रिपाठी
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