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हे महाकाल

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हे सर्वेश्वर हे जगतपाल;
        
                                                    
                            
हे औढ़रदानीं महाकाल।
हे भूतेश्वर हे नागेश्वर ;
हे बर्फ़ानीं हे विश्वभाल।।
जुग-जुग तेरा आशीष रहे
भारत का उन्नत शीश रहे,

हे रामेश्वर हे जगदीश्वर ;
हे दीनबंधु हे अमरीश्वर ।
हे शिवशंकर हे भंडारी ;
हे अभयंकर हे प्रलयंकर।।
हे नीलकंठ हे अमरकंठ ;
जुग-जुग तेरा आशीश रहे
भारत का उन्नत शीश रहे

हे जगदंबा शिवपटरानी ;
हे महाकालिका कल्यानीं।
हे शत्रु शमन करने वाली
हे दुष्टदलनि सुर रक्षानीं।।
जुग-जुग तेरा आशीश रहे
भारत का उन्नत शीश रहे

हो मंगल-मंगल दिशा-दिशा।
बरसाये अमृत निशा-निशा।।
मिट जाये शत्रू दंभि क्रूर।
सपने हो उसके चकनाचूर।।
हे धुरयटी हे उमाँपति
जुग-जुग तेरा आशीश रहे
भारत का उन्नत शीश रहे।।

पंडित अनिल
अहमदनगर महाराष्ट्र


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