हमख़्याली में तेरे हम
तुझसे हुए जाते हैं-
यूं ही एक दिन
तेरे रंग में रंगे
भीड़ में कहीं
मिल जाएँ,
पहचान लोगे या
मिलते ही जान कहोगे !
सोहबत का असर है
ये; आपका हरसू
एक-एक शेर कह लूँ
और गज़ल कर लूं,
आप ही की गज़ल है
आप ही को नज़र कर दूँ,
हाथ थाम कर मेरा
इरशाद कहिएगा;
गज़ल बहक न् जाए कहीं,
गज़ल कहने में ...
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