भाग्य,भाग रहा कर्म के पीछे
क्यों पड़े हम भाग्य के पीछे?
कर्म करते जाना है
धर्म करते जाना है
वादे जो किये उसे हमें निभाना है
भाग्य तो कर्महीनों का बहाना है
भाग्य आयेगा सामने से सलामी देने
अपनी नौका को अपने हमें हैं खेने
भाग्य नहीं सदा सोता है
श्रमी विजयी सदा होता है।
- सहज