ईश्वर को हम हमेशा अपने दिलों में रख कर घूमते हैं
धरती मां को हमेशा हम घूम घूम कर चूमते हैं
तुम झूठे मुझे मंदिर,मस्जिद,गिरिजा घर घूमा रहे हो
सच्चाई बसती सदा सबके दिलों में,क्यों तब तुम झूठ को
सच बना कर,बार बार मेरे मुंह तक लाकर चूमा रहे हो?
सहज