नादान गुब्बारे सा हम फूल जाते हैं
हम क्या हैं बात यही भूल जाते हैं
जिद्द पर अपने हम तूल जाते हैं
उम्र जाति वतन धर्म भूल जाते हैं
नादान गुब्बारे हैं हम, फूल जाते हैं।
- सहज