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ताम झाम

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसान हमारे, सुबह से शाम तक
        
                                                    
                            
मजदूर हमारे,दिन से रात तक
दुकानदार हमारे, मुलाकात तक
कर रहे काम, बिना किए आराम
कोई खेत में,कोई रेत में,सह रहा घाम
धनिकों का क्या?जो कर रहे ए.सी.मेंआराम
चाय, काफी की चुस्कियां ले रहे आठों जाम
केवल यहां है गरीबों का काम तमाम
छोटे छोटे प्यारे प्यारे बच्चों को तड़पा तड़पा कर
चूस रहे खून स्वार्थ की सूई लगा कर
सदियों से कर रहे बच्चों को नीलाम
धनिकों का है यह सारा ताम झाम।
- सहज
2 वर्ष पहले
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